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Teaching & EducationUP TET/Super TET
Uttar Pradesh Basic Education Board
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परीक्षा सारांश
अवलोकन
आयोजक संस्था
Uttar Pradesh Basic Education Board
आपको क्या मिलेगा
Teaching eligibility & recruitment in UP Govt Schools
नवीनतम सामग्री चक्र
2026
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EligibilityPending verification
Exam patternPending verification
Qualification pathway
Clear each applicable stage in order
Final selection or admission still depends on the published cutoff or merit list and any applicable counselling, document, medical, preference and vacancy rules.
Selection sequence
- 1
UPTET Paper I — for a candidate who intends to teach classes 1 to 5
RequiredThe booklet prints the section table and its own total row reading 150 MCQs and 150 marks.
- 2
UPTET Paper II — for a candidate who intends to teach classes 6 to 8
RequiredThe booklet prints the section table and its own total row reading 150 MCQs and 150 marks. Paper I and Paper II are separate papers, not sequential rounds — a candidate eligible for both levels may take both within one online application.
Paper and stage details
What each stage contains
UPTET Paper I — for a candidate who intends to teach classes 1 to 5
Single offline OMR paper of 150 minutesQuestions
Not stated
Maximum marks
Not stated
Duration
Not stated
2026 section structure
| Question type | Per subject | Full marks | Negative marks | Partial marks |
|---|---|---|---|---|
| + | None | No | ||
| + | None | No | ||
| + | None | No | ||
| + | None | No | ||
| + | None | No |
UPTET Paper II — for a candidate who intends to teach classes 6 to 8
Single offline OMR paper of 150 minutesQuestions
Not stated
Maximum marks
Not stated
Duration
Not stated
2026 section structure
| Question type | Per subject | Full marks | Negative marks | Partial marks |
|---|---|---|---|---|
| + | None | No | ||
| + | None | No | ||
| + | None | No | ||
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सभी 24 विषय और 50 अध्याय शामिल हैं — कुल 443 टॉपिक में से 420 यहाँ दिखाए गए हैं।कुछ भी हटाया नहीं गया है। हर विषय में उसकी पूरी टॉपिक सूची का लिंक मौजूद है।
बाल विकास एवं शिक्षण विधियाँ
बाल विकासः–
- बाल विकास का अर्थ, आवश्यकता तथा क्षेत्र, बाल विकास की अवस्थाएं शारीरिक विकास, मानसिक विकास, संवेगात्मक विकास, भाषा विकास– अभिव्यक्ति क्षमता का विकास, सृजनात्मकता एवं सृजनात्मक क्षमता का विकास।
- बाल विकास के आधार एवं उनको प्रभावित करने वाले कारक–वंशानुक्रम, वातावरण। (पारिवारिक, सामाजिक, विद्यालयीय, संचार माध्यम)
सीखने का अर्थ तथा सिद्धान्तः–
- अधिगम (सीखने) का अर्थ प्रभावित करने वाले कारक, अधिगम की प्रभावशाली विधियाँ।
- अधिगम के नियम– थार्नडाइक के सीखने के मुख्य नियम एव अधिगम में उनका महत्व।
- अधिगम के प्रमुख सिद्धान्त तथा कक्षा शिक्षण में इनकी व्यावहारिक उपयोगिता, थार्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धान्त, पैवलव का सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त, स्किनर का क्रिया प्रसूत अधिगम सिद्धान्त, कोहलर का सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धान्त, प्याजे का सिद्धान्त, व्योगास्की का सिद्धान्त सीखने का वक्र– अर्थ एवं प्रकार, सीखने में पठार का अर्थ और कारण एवं निराकरण।
शिक्षण, शिक्षण विधाएँ
- शिक्षण का अर्थ तथा उद्देश्य, सम्प्रेषण, शिक्षण के सिद्धान्त, शिक्षण के सूत्र, शिक्षण प्रविधियाँ, शिक्षण की नवीन विधाएँ (उपागम), सूक्ष्म शिक्षण एवं शिक्षण के आधारभूत कौशल।
समावेशी शिक्षा–निर्देशन एवं परामर्श
- शैक्षिक समावेशन से अभिप्राय, पहचान, प्रकार, निराकरण यथाः अपवंचित वर्ग, भाषा, धर्म, जाति, क्षेत्र, वर्ण, लिंग, शारीरिक दक्षता (दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित एवं वाक्/अस्थिबाधित), मानसिक दक्षता।
- समावेशन के लिए आवश्यक उपकरण, सामग्री, विधियाँ, टी0एल0एम0 एवं अभिवृत्तियाँ।
- समावेशित बच्चों का अधिगम जाँचने हेतु आवश्यक टूल्स एवं तकनीकी।
- समावेशित बच्चों के लिए विशेष शिक्षण विधियाँ। यथा ब्रेललिपि आदि।
- समावेशी बच्चों हेतु निर्देशन एवं परामर्श– अर्थ, उद्देश्य, प्रकार, विधियाँ, आवश्यकता एवं क्षेत्र।
- परामर्श में सहयोग देने वाले विभाग/संस्थाएँः–
- मनोविज्ञानशाला उ0प्र0, प्रयागराज
- मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र (मण्डल स्तर पर)
- जिला चिकित्सालय
- जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षत डायट मेण्टर
- पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र
- समुदाय एवं विद्यालय की सहयोगी समितियाँ
- सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन
- बाल–अधिगम में निर्देशन एवं परामर्श का महत्व।
अधिगम और अध्यापनः–
- बालक किस प्रकार सोचते और सीखते हैं; बालक विद्यालय प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में कैसे और क्यों ’असफल’ होते हैं।
- अधिगम और अध्यापन की बुनियादी प्रक्रियाएं; बालकों की अधिगम कार्यनीतियां सामाजिक क्रियाकलाप के रूप में अधिगम; अधिगम के सामाजिक सन्दर्भ।
- एक समस्या समाधानकर्ता और एक ’वैज्ञानिक अन्वेषक’ के रूप में बालक।
- बालकों में अधिगम की वैकल्पिक संकल्पना; अधिगम प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरणों के रूप में बालक की ’त्रुटियों’ को समझना।
- बोध और संवेदनाएं।
- प्रेरणा और अधिगम।
- अधिगम में योगदान देने वाले कारक– निजी एवं पर्यावरणीय।
भाषा– I
हिन्दी (विषय वस्तु)ः–
- अपठित अनुच्छेद।
- हिन्दी वर्णमाला। (स्वर, व्यंजन)
- वर्णों के मेल से मात्रिक तथा अमात्रिक शब्दों की पहचान।
- वाक्य रचना।
- हिन्दी की सभी ध्वनियों के पारस्परिक अंतर की जानकारी विशेष रूप से– ष, स, श, ब, व, ढ, ड, ङ, क्ष, छ, ण, तथा न की ध्वनियाँ।
- हिन्दी भाषा की सभी ध्वनियों, वर्णों, अनुस्वार, अनुनासिक एवं चन्द्रबिन्दु में अन्तर।
- संयुक्ताक्षर एवं अनुनासिक ध्वनियों के प्रयोग से बने शब्द।
- सभी प्रकार की मात्राएँ।
- विराम चिन्हों यथा– अल्प विराम, अर्धविराम, पूर्णविराम, प्रश्नवाचक, विस्मयबोधक, चिन्हों का प्रयोग।
- विलोम, समानार्थी, तुकान्त, अतुकान्त, समान ध्वनियों वाले शब्द।
- संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया एवं विशेषण के भेद।
- वचन लिंग एवं काल।
- प्रत्यय, उपसर्ग, तत्सम, तद्भव व देशज, शब्दों की पहचान एवं उनमें अन्तर।
- लोकोक्तियों एवं मुहावरों के अर्थ।
- सन्धि– (1) स्वर सन्धि– दीर्घ सन्धि, गुण सन्धि, वृद्धि सन्धि, यण् सन्धि, अयादि सन्धि। (2) व्यंजन सन्धि। (3) विसर्ग सन्धि।
- वाच्य, समास एवं अलंकार के भेद।
- कवियों एवं लेखकों की रचनाएं।
भाषा विकास का अध्यापनः–
- अधिगम और अर्जन।
- भाषा अध्यापन के सिद्धान्त।
- सुनने और बोलने की भूमिकाः भाषा का कार्य तथा बालक इसे किस प्रकार एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हैं।
- मौखिक और लिखित रूप में विचारों के संप्रेषण के लिए किसी भाषा के अधिगम में व्याकरण की भूमिका पर निर्णायक संदर्श।
- एक भिन्न कक्षा में भाषा पढ़ाने की चुनौतियां; भाषा की कठिनाइयाँ, त्रुटियां और विकार।
- भाषा कौशल।
- भाषा बोधगम्यता और प्रवीणता का मूल्यांकन करनाः बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना।
- अध्यापन– अधिगम सामग्रियांः पाठ्यपुस्तक, मल्टी मीडिया सामग्री, कक्षा का बहुभाषायी संसाधन।
- उपचारात्मक अध्यापन।
भाषा– II ENGLISH
विषय वस्तुः–
- Unseen Passage
- The Sentences
- (a) Subject and Predicate
- (b) Kinds of Sentences
- Parts of Speech
- Kinds of Noun
- Pronoun
- Adverb
- Adjective
- Verb
- Preposition
- Conjunction
- Tenses- Present, Past, Future
- Articles
- Punctuation
- Word Formation
- Active & Passive Voice
- Singular & Plural
- Gender
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भाषा– II उर्दू
विषय वस्तुः–
- अपठित अनुच्छेद।
- ज़बान की फन्नी महारतों की मालूमात।
- मशहूर अदीबों एवं शायरों की हालातें जिन्दगीं एवं उनकी रचनाओं की जानकारी।
- मुखतलिफ असनाफे अदब जैसे, मज़मून, अफसाना मर्सिया, मसनवी दास्तान वर्गरह की तारीफ मअ, अमसाल।
- सही इमला f वं तलफ्फुज की मश्क़।
- इस्म, जमीर, सिफत, मुतज़ाद अल्फ़ाज, वाहिद, जमा, मोजक्कर, मोअन्नस वगैरह की जानकारी।
- सनअते, (तशबीह व इस्तआरा, तलमीह, मराअतुन्नजीर) वगैरह।
- मुहावरें, जर्बुल अमसाल की मालूमात।
- मखतलिफ समाजी मसायल जैसे माहौलियाती आलूदगी जिन्सी नाबराबरी, नाख्वान्दगी, तालीम बराएअम्न, अदमे, तग़जिया, वगैरह की मालूमात।
- नज़्मो, कहानियों, हिकायतों एवं संस्मरणों में मौजूद समाजी एवं एखलाकी अक़दार को समझना।
भाषा– II संस्कृत
विषय वस्तुः–
- अपठित अनुच्छेद
संज्ञाएँ–
- अकारान्त पुल्लिंग।
- अकारान्त स्त्रीलिंग।
- अकारान्त नपुंसकलिंग।
- ईकारान्त स्त्रीलिंग।
- उकारान्त पुल्लिंग।
- ऋकारान्त पुल्लिंग।
- ऋकारान्त स्त्रीलिंग।
- घर, परिवार, परिवेश, पशु, पक्षियों, घरेलू उपयोग की वस्तुओं के संस्कृत नामों से परिचय।
- सर्वनाम।
- क्रियाएँ।
- शरीर के प्रमुख अंगों के संस्कृत शब्दों का प्रयोग।
- अव्यय।
- सन्धि–सरल शब्दों की सन्धि तथा उनका विच्छेद् (दीर्घ सन्धि)।
- संख्याएँ–संस्कृत में संख्याओं का ज्ञान।
- लिंग, वचन, प्रत्याहार, स्वर के प्रकार, व्यंजन के प्रकार, अनुस्वार एवं अनुनासिक व्यंजन।
- स्वर व्यंजन एवं विसर्ग सन्धियाँ, समास उपसर्ग, पर्यायवाची शब्द, विलोम शब्द, कारक, प्रत्यय एवं वाच्य।
- कवियों एवं लेखकों की रचनाएँ।
भाषा विकास का अध्यापनः–
- अधिगम और अर्जन।
- भाषा अध्यापन के सिद्धान्त।
- सुनने और बोलने की भूमिकाः भाषा का कार्य तथा बालक इसे किस प्रकार एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हैं।
- मौखिक और लिखित रूप में विचारों के संप्रेषण के लिए किसी भाषा के अधिगम में व्याकरण की भूमिका पर निर्णायक संदर्श।
- एक भिन्न कक्षा में भाषा पढ़ाने की चुनौतियां; भाषा की कठिनाईयां, त्रुटियां और विकार।
- भाषा कौशल।
- भाषा बोधगम्यता और प्रवीणता का मूल्यांकन करनाः बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना।
- अध्यापन– अधिगम सामग्रियांः पाठ्यपुस्तक, मल्टी मीडिया सामग्री, कक्षा का बहुभाषायी संसाधन।
- उपचारात्मक अध्यापन।
गणित
विषय वस्तुः–
- संख्याएँ एवं संख्याओं का जोड़, घटाना गुणा, भाग।
- लघुत्तम समापवर्त्य एवं महत्तम समापवर्तक।
- भिन्नों का जोड़, घटाना, गुणा व भाग।
- दशमलव– जोड़, घटाना, गुणा व भाग।
- ऐकिक नियम।
- प्रतिशत।
- लाभ–हानि।
- साधारण ब्याज।
- ज्यामिति–ज्यामितीय आकृतियाँ एवं पृष्ठ, कोण, त्रिभुज, वृत्त।
- धन (रुपया–पैसा)।
- मापन– समय, तौल, धारिता, लम्बाई एवं ताप।
- परिमिति (परिमाप) – त्रिभुज, आयत, वर्ग, चतुर्भुज।
- कैलेण्डर।
- आंकड़े।
- आयतन, धारिता–घन, घनाभ।
- क्षेत्रफल– आयत, वर्ग।
- रेलवे या बस समय–सारिणी।
- आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण एवं निरूपण।
अध्यापन संबन्धी मुद्देः–
- गणितीय/तार्किक चिंतन की प्रकृति; बालक के चिंतन एवं तर्कशक्ति पैटर्नों तथा अर्थ निकालने और अधिगम की कार्यनीतियों को समझना।
- पाठ्यचर्या में गणित का स्थान।
- गणित की भाषा।
- सामुदायिक गणित।
- औपचारिक एवं अनौपचारिक पद्धतियों के माध्यम से मूल्यांकन।
- शिक्षण की समस्याएं।
- त्रुटि विश्लेषण तथा अधिगम एवं अध्यापन के प्रासंगिक पहलू।
- नैदानिक एवं उपचारात्मक शिक्षण।
पर्यावरणीय अध्ययन (विज्ञान, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र एवं पर्यावरण)
विषय वस्तुः–
- परिवार।
- भोजन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता।
- आवास।
- पेड़–पौधे एवं जन्तु।
- हमारा परिवेश।
- मेला।
- स्थानीय पेशे से जुड़े व्यक्ति एवं व्यवसाय।
- जल।
- यातायात एवं संचार।
- खेल एवं खेल भावना।
- भारत– नदियां, पर्वत, पठार, वन, यातायात, महाद्वीप एवं महासागर।
- हमारा प्रदेश– नदियां, पर्वत, पठार, वन, यातायात।
- संविधान।
- शासन व्यवस्था– स्थानीय स्वशासन, ग्राम–पंचायत, नगर–पंचायत, जिला–पंचायत, नगर–पालिका, नगर–निगम, जिला–प्रशासन, प्रदेश की शासन व्यवस्था, व्यवस्थापिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका, राष्ट्रीय–पर्व, राष्ट्रीय–प्रतीक, मतदान, राष्ट्रीय एकता।
- पर्यावरण–आवश्यकता, महत्व एवं उपयोगिता, पर्यावरण–संरक्षण, पर्यावरण के प्रति सामाजिक दायित्वबोध, पर्यावरण संरक्षण हेतु संचालित योजनाएँ।
अध्यापन संबन्धी मुद्देः–
- पर्यावरणीय अध्ययन की अवधारणा और व्याप्ति।
- पर्यावरणीय अध्ययन का महत्व, एकीकृत पर्यावरणीय अध्ययन।
- पर्यावरणीय अध्ययन एवं पर्यावरणीय शिक्षा।
- अधिगम सिद्धान्त।
- विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की व्याप्ति और संबन्ध।
- अवधारणा प्रस्तुत करने के दृष्टिकोण।
- क्रियाकलाप।
- प्रयोग/व्यावहारिक कार्य।
- चर्चा।
- सतत् व्यापक मूल्यांकन।
- शिक्षण सामग्री/उपकरण।
- समस्याएँ।
बाल विकास एवं शिक्षण विधियाँ
विषय–वस्तुः–
- बाल विकास का अर्थ, आवश्यकता तथा क्षेत्र, बाल विकास की अवस्थाएं, शारीरिक विकास, मानसिक विकास, संवेगात्मक विकास, भाषा विकास, अभिव्यक्ति क्षमता का विकास, सृजनात्मकता एवं सृजनात्मक क्षमता का विकास।
- बाल विकास के आधार एवं उनको प्रभावित करने वाले कारक–वंशानुक्रम, वातावरण (पारिवारिक, सामाजिक, विद्यालयीय, संचार माध्यम)।
सीखने का अर्थ तथा सिद्धान्तः–
- अधिगम (सीखने) का अर्थ प्रभावित करने वाले कारक, अधिगम की प्रभावशाली विधियाँ।
- अधिगम के नियम– थार्नडाइक के सीखने के मुख्य नियम एवं अधिगम में उनका महत्व।
- अधिगम के प्रमुख सिद्धान्त तथा कक्षा शिक्षण में इनकी व्यावहारिक उपयोगिता, थार्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धान्त, पैवलव का सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त, स्किनर का क्रिया प्रसूत अधिगम सिद्धान्त, कोहलर का सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्वान्त, प्याजे का सिद्वान्त, व्योगास्की का सिद्वान्त सीखने का वक्र– अर्थ एवं प्रकार, सीखने में पठार का अर्थ और कारण एवं निराकरण।
शिक्षण एवं शिक्षण विधाएँः–
- शिक्षण का अर्थ तथा उद्देश्य, सम्प्रेषण, शिक्षण के सिद्धान्त, शिक्षण के सूत्र, शिक्षण प्रविधियाँ, शिक्षण की नवीन विधाएँ (उपागम), सूक्ष्म शिक्षण एवं शिक्षण के आधारभूत कौशल।
समावेशी शिक्षा–निर्देशन एवं परामर्शः–
- शैक्षिक समावेशन से अभिप्राय, पहचान, प्रकार, निराकरण यथाः अपवंचित वर्ग, भाषा, धर्म, जाति, क्षेत्र, वर्ण, लिंग, शारीरिक दक्षता (दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित एवं वाक्/अस्थि बाधित), मानसिक दक्षता।
- समावेशन के लिए आवश्यक उपकरण, सामग्री, विधियाँ, टी0एल0एम0 एवं अभिवृत्तियाँ।
- समावेशित बच्चों का अधिगम जाँचने हेतु आवश्यक टूल्स एवं तकनीकी।
- समावेशित बच्चों के लिए विशेष शिक्षण विधियाँ यथा ब्रेललिपि आदि।
- समावेशी बच्चों हेतु निर्देशन एवं परामर्श– अर्थ, उद्देश्य, प्रकार, विधियाँ, आवश्यकता एवं क्षेत्र।
- परामर्श में सहयोग देने वाले विभाग/संस्थाएँ।
- मनोविज्ञानशाला उ0प्र0, प्रयागराज।
- मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र। (मण्डल स्तर पर)
- जिला चिकित्सालय।
- जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षित डायट मेण्टर।
- पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तन्त्र।
- समुदाय एवं विद्यालय की सहयोगी समितियाँ।
- सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन।
- बाल–अधिगम में निर्देशन एवं परामर्श का महत्व।
अध्ययन और अध्यापनः–
- बालक किस प्रकार सोचते और सीखते हैं; बालक विद्यालय प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में कैसे और क्यों ’असफल’ होते हैं।
- शिक्षण और अधिगम की बुनियादी प्रक्रियाएं; बालकों की अध्ययन कार्यनीतियां; सामाजिक क्रियाकलाप के रूप में अधिगम, अधिगम के सामाजिक संदर्भ।
- एक समस्या समाधानकर्ता और एक ’वैज्ञानिक अन्वेषक’ के रूप में बालक।
- बालकों में अधिगम की वैकल्पिक संकल्पना; अधिगम प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरणों के रूप में बालक की ’त्रुटियों’ को समझना।
- बोध और संवेदनाएं।
- प्रेरणा और अधिगम।
- अधिगम में योगदान देने वाले कारक– निजी एवं पर्यावरणीय।
भाषा– I हिन्दी
विषय–वस्तुः–
- अपठित अनुच्छेद।
- संज्ञा एवं संज्ञा के भेद।
- सर्वनाम एवं सर्वनाम के भेद।
- विशेषण एवं विशेषण के भेद।
- क्रिया एवं क्रिया के भेद।
- वाच्य– कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य।
- हिन्दी भाषा की समस्त ध्वनियों, संयुक्ताक्षरों, संयुक्त व्यंजनों, अनुस्वार एवं चन्द्रबिन्दु में अन्तर।
- वर्णक्रम, पर्यायवाची, विपरीतार्थक, अनेकार्थक, समानार्थी शब्द।
- अव्यय के भेद।
- अनुस्वार, अनुनासिक का प्रयोग।
- ’’र’’ के विभिन्न रूपों का प्रयोग।
- वाक्य निर्माण (सरल, संयुक्त एवं मिश्रित वाक्य)।
- विराम चिन्हों की पहचान एवं उपयोग।
- वचन, लिंग एवं काल का प्रयोग।
- तत्सम, तद्भव, देशज एवं विदेशी शब्द।
- उपसर्ग एवं प्रत्यय।
- शब्द युग्म।
- समास, समास विग्रह एवं समास के भेद।
- मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ।
- क्रिया सकर्मक एवं अकर्मक।
- सन्धि एवं सन्धि के भेद। (स्वर, व्यंजन एवं विसर्ग सन्धियाँ)।
भाषा विकास का अध्यापनः–
- अधिगम अर्जन।
- भाषा अध्यापन के सिद्धान्त।
- सुनने और बोलने की भूमिका; भाषा का कार्य तथा बालक इसे किस प्रकार एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हैं।
- मौखिक और लिखित रूप में विचारों के संप्रेषण के लिए किसी भाषा के अधिगम में व्याकरण की भूमिका पर विवेचित संदर्श।
- एक भिन्न कक्षा में भाषा पढ़ाने की चुनौतियां; भाषा की कठिनाइयां, त्रुटियां और विकार।
- भाषा कौशल।
- भाषा बोधगम्यता और प्रवीणता का मूल्यांकन करनाः बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना।
- अध्यापन–अधिगम सामग्रियांः पाठ्यपुस्तक, मल्टी मीडिया सामग्री, कक्षा का बहुभाषायी संसाधन।
- उपचारात्मक अध्यापन।
इस विषय के 31 टॉपिक में से 30 दिखाए गए हैं।सभी 31 टॉपिक देखें →
भाषा– II ENGLISH
विषय–वस्तुः–
- Unseen Passage
- Nouns and its Kinds
- Pronoun and its Kinds
- Verb and its Kinds
- Adjective and its Kinds & Degrees
- Adverb and its Kinds
- Preposition and its Kinds
- Conjunction and its Kinds
- Intersection
- Singular and Plural
- Subject and Predicate
- Negative and interrogative sentences
- Masculine and Feminine Gender
- Punctuations
- Suffix with Root words
- Phrasal Verbs
- Use of Somebody, Nobody, Anybody
- Part of Speech
- Narration
- Active voice and Passive voice
- Antonyms & Synonyms
इस विषय के 24 टॉपिक में से 21 दिखाए गए हैं।सभी 24 टॉपिक देखें →
भाषा– II उर्दू
विषय–वस्तुः–
- अपठित अनुच्छेद।
- ज़बान की फन्नी महारतों की जानकारी।
- मुखतलिफ असनाफ्े अदब हम्द, ग़ज़ल, कसीदा,मर्सिया, मसनवी, गीत वगैरह की समझ एवं उनके फर्क को समझना।
- मुखतलिफ शायरों, अदीबों की हालाते जिन्दगी से वाकफियत एवं उनकी तसानीफ की जानकारी हासिल करना।
- मुल्क की मुश्तरका तहज़ीब में उर्दू जब़ान की खिदमत और अहमियत से वाकफियत हासिल करना।
- इस्म व उसके अक़साम, फेल, सिफत, ज़मीर, तज़कीरओं तानीस, तज़ाद की समझा।
- सही इमला एवं एराब की जानकारी होना।
- मुहावरे एवं जर्बुल अमसाल से वाक़फियत हासिल करना।
- सनअतों की जानकारी होना।
- सियासी, समाजी एवं एख्लाकी मसाइल के तईं बेदार होना और उस पर अपना नज़रिया वाजे रखना।
भाषा– II संस्कृत
विषय–वस्तुः–
- अपठित अनुच्छेद।
- सन्धि– स्वर, व्यंजन।
- अव्यय।
- समास।
- लिंग, वचन एवं काल का प्रयोग।
- उपसर्ग।
- पर्यायवाची।
- विलोम।
- कारक।
- अलंकार।
- प्रत्यय।
- वाच्य।
- संज्ञाएँ– निम्नवत् सभी शब्दों की सभी विभक्ति एवं वचनों के रूपों का ज्ञानः–
- पुल्लिंग शब्द।
- स्त्रीलिंग शब्द।
- नपुंसकलिंग शब्द।
- अकारान्त पुल्लिंग।
- अकारान्त स्त्रीलिंग।
- अकारान्त नपुंसकलिंग।
- उकारान्त पुल्लिंग।
- उकारान्त स्त्रीलिंग।
भाषा विकास का अध्यापनः–
- अधिगम और अर्जन।
- भाषा अध्यापन का सिद्धान्त।
- सुनने और बोलने की भूमिका; भाषा का कार्य तथा बालक इसे किस प्रकार एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हैं।
- मौखिक और लिखित रूप में विचारों के संप्रेषण के लिए किसी भाषा के अधिगम में व्याकरण की भूमिका पर निर्णायक संदर्श।
- एक भिन्न कक्षा में भाषा पढ़ाने की चुनौतियां; भाषा की कठिनाईयां, त्रुटियां और विकार।
- भाषा कौशल।
- भाषा बोधगम्यता और प्रवीणता का मूल्यांकन करनाः बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना।
- अध्यापन–अधिगम सामग्रीः पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री, कक्षा का बहुभाषायी संसाधन।
- उपचारात्मक अध्यापन।
इस विषय के 39 टॉपिक में से 30 दिखाए गए हैं।सभी 39 टॉपिक देखें →
गणित एवं विज्ञान
गणित विषय–वस्तुः–
- प्राकृतिक संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ, परिमेय संख्याएँ।
- पूर्णांक, कोष्ठक, लघुत्तम समापवर्त्य एवं महत्तम समापवर्तक।
- वर्गमूल।
- घनमूल।
- सर्वसमिकाएँ।
- बीजगणित, अवधारणा– चर संख्याएँ, अचर संख्याएँ, चर संख्याओं की घात।
- बीजीय व्यंजकों का जोड़, घटाना, गुणा एवं भाग, बीजीय व्यंजकों के पद एवं पदों के गुणांक, सजातीय एवं विजातीय पद, व्यंजकों की डिग्री, एक, दो एवं त्रिपदीय व्यंजकों की अवधारणा।
- युगपद समीकरण, वर्ग समीकरण, रेखीय समीकरण।
- समान्तर रेखाएँ, चतुर्भुज की रचना, त्रिभुज।
- वृत्त और चक्रीय चतुर्भुज।
- वृत्त की स्पर्श रेखाएँ।
- वाणिज्य गणित– अनुपात, समानुपात, प्रशितता, लाभ–हानि, साधारण ब्याज, चक्रवृद्धि ब्याज, कर (टैक्स), वस्तु विनिमय प्रणाली।
- बैंकिंग– वर्तमान मुद्रा, बिल तथा कैशमेमो।
- सांख्यिकी– आंकड़ों का वर्गीकरण, पिक्टोग्राफ, माध्य, माध्यिका एवं बहुलक, बारम्बारता।
- पाई एवं दण्ड चार्ट, अवर्गीकृत आंकड़ों का चित्र।
- सम्भावना (प्रायिकता) ग्राफ, दण्ड, आरेख तथा मिश्रित दण्ड आरेख।
- कार्तीय तल।
- क्षेत्रमिति (मेन्सुरेशन)।
- घातांक।
गणित अध्यापन सम्बन्धी मुद्देः–
- गणितीय/तार्किक चिंतन की प्रकृति।
- पाठ्यचर्या में गणित का स्थान।
- गणित की भाषा।
- सामुदायिक गणित।
- मूल्यांकन।
- उपचारात्मक शिक्षण।
- शिक्षण की समस्याएं।
विज्ञान विषय–वस्तुः–
- दैनिक जीवन में विज्ञान, महत्वपूर्ण खोज, महत्व, मानव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी।
- रेशे एवं वस्त्र, रेशों से वस्त्रों तक। (प्रक्रिया)
- सजीव, निर्जीव पदार्थ– जीव जगत, सजीवों का वर्गीकरण, जनतु एवं वनस्पति के आधार पर पौधों का वर्गीकरण एवं जन्तुओं का वर्गीकरण, जीवों में अनुकूलन, जन्तुओं एवं पौधों में परिवर्तन।
- जन्तु की संरचना एवं कार्य।
- सूक्ष्म जीव एवं उनका वर्गीकरण।
- कोशिका से अंगतन्त्र तक।
- किशोरावस्था, विकलांगता।
- भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं रोग, फसल उत्पादन, नाइट्रोजन चक्र।
- जन्तुओं में पोषण।
- पौधों में पोषण, जनन, लाभदायक पौधे।
- जीवों में श्वसन, उत्सर्जन, लाभदायक जन्तु।
- मापन
- विद्युत धारा।
- चुम्बकत्व।
- गति, बल एवं यंत्र।
- ऊर्जा।
- कम्प्यूटर।
- ध्वनि।
- स्थिर विद्युत।
- प्रकाश एवं प्रकाश यंत्र।
विज्ञान अध्यापन सम्बन्धी मुद्देः–
- विज्ञान की प्रकृति और संरचना।
- प्राकृतिक विज्ञान/लक्ष्य और उद्देश्य।
- विज्ञान को समझना और उसकी सराहना करना।
- दृष्टिकोण/एकीकृत दृष्टिकोण।
- प्रेक्षण/प्रयोग/अन्वेषण (विज्ञान की पद्धति)।
- अभिनवता।
- पाठ्यचर्या सामग्री/सहायता सामग्री।
- मूल्यांकन।
- समस्याएं।
- उपचारात्मक शिक्षण।
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सामाजिक अध्ययन व अन्य
इतिहास
- इतिहास जानने के स्रोत।
- पाषाणकालीन संस्कृति, ताम्र पाषाणिक संस्कृति, वैदिक संस्कृति।
- छठी शताब्दी ई0पू0 का भारत।
- भारत के प्रारम्भिक राज्य।
- भारत में मौर्य साम्राज्य की स्थापना।
- मौर्योत्तरकालीन भारत, गुप्त काल, राजपूतकालीन भारत, पुष्यभूति वंश, दक्षिण भारत के राज्य।
- इस्लाम का भारत में आगमन।
- दिल्ली सल्तनत की स्थापना, विस्तार, विघटन।
- मुगल साम्राज्य, संस्कृति, पतन।
- यूरोपीय शक्तियों का भारत में आगमन एवं अंग्रेजी राज्य की स्थापना।
- भारत में कम्पनी राज्य का विस्तार।
- भारत में नवजागरण, भारत में राष्ट्रवाद का उदय।
- स्वाधीनता आन्दोलन, स्वतंत्रता प्राप्ति, भारत विभाजन।
- स्वतंत्र भारत की चुनौतियां।
नागरिक शास्त्र
- हम और हमारा समाज।
- ग्रामीण एवं नगरीय समाज व रहन सहन।
- ग्रामीण व नगरीय स्वशासन।
- जिला प्रशासन।
- हमारा संविधान।
- यातायात सुरक्षा।
- केन्द्रीय व राज्य शासन व्यवस्था।
- भारत में लोकतंत्र।
- देश की सुरक्षा एवं विदेश नीति।
- वैश्विक समुदाय एवं भारत।
- नागरिक सुरक्षा।
- दिव्यांगता।
भूगोल
- सौरमण्डल में पृथ्वी, ग्लोब– पृथ्वी पर स्थानों का निर्धारण, पृथ्वी की गतियाँ।
- मानचित्रण, पृथ्वी के चार परिमण्डल, स्थल मण्डल– पृथ्वी की संरचना, पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप।
- विश्व में भारत, भारत का भौतिक स्वरूप, मृदा, वनस्पति एवं वन्य जीव, भारत की जलवायु, भारत के आर्थिक संसाधन, यातायात, व्यापार एवं संचार।
- उत्तर प्रदेश– भारत में स्थान, राजनीतिक विभाग, जलवायु, मृदा, वनस्पति एवं वन्यजीव, कृषि, खनिज, उद्योग–धन्धे, जनसंख्या एवं नगरीकरण।
- धरातल के रूप, बदलने वाले कारण(आन्तरिक एवं वाह्य कारक)।
- वायुमण्डल, जलमण्डल।
- संसार के प्रमुख प्राकृतिक प्रदेश एवं जनजीवन।
- खनिज संसाधन, उद्योग–धन्धे।
- आपदा एवं आपदा प्रबन्धन।
पर्यावरणीय अध्ययन
- पर्यावरणीय, प्राकृतिक संसाधन एवं उनकी उपयोगिता।
- प्रकृतिक संतुलन।
- संसाधनों का उपयोग।
- जनसंख्या वृद्धि का पर्यावरण पर प्रभाव, पर्यावरण–प्रदूषण।
- अपशिष्ट प्रबन्धन, आपदाएँ, पर्यावरणविद्, पर्यावरण के क्षेत्र में पुरस्कार, पर्यावरण दिवस, पर्यावरण कैलेण्डर।
गृहशिल्प/गृह विज्ञान
- स्वास्थ्य एवं स्वच्छता।
- पोषण, रोग एवं उनसे बचने के उपाय, प्राथमिक उपचार।
- खाद्य पदार्थों का संरक्षण।
- प्रदूषण।
- पाचन सम्बन्धी रोग एवं सामान्य बीमारियाँ।
- गृह प्रबन्धन, सिलाई कला, धुलाई कला, पाक कला, बुनाई कला, कढाई कला।
शारीरिक शिक्षा एवं खेल
- शारीरिक शिक्षा, व्यायाम, योग एवं प्राणायाम।
- मार्चिंग, राष्ट्रीय खेल एवं पुरस्कार।
- छोटे एवं मनोरंजनात्मक खेल, अन्तर्राष्ट्रीय खेल।
- खेल और हमारा भोजन।
- प्राथमिक चिकित्सा।
- नशीले पदार्थों के दुष्परिणाम एवं उनसे बचाव का उपाय, खेलकूद, खेल प्रबन्धन एवं नियोजन का महत्व।
संगीत
- स्वर ज्ञान।
- राग परिचय।
- संगीत में लय एवं ताल का ज्ञान।
- तीव्र मध्यम वाले राग।
- वन्दना गीत/झण्डा गान।
- देशगान, देशगीत, भजन।
- वनसंरक्षण/वृक्षारोपण।
- क्रियात्मक गीत।
उद्यान विज्ञान एवं फलसंरक्षण
- मिट्टी, मृदा गठन, भू–परिष्करण, यंत्र, बीज, खाद उर्वरक।
- सिंचाई, सिंचाई के यंत्र।
- बाग लगाना, विद्यालय वाटिका।
- झाड़ी एवं लताएँ, शोभा वाले पौधे, मौसमी फूल की खेती, फलों की खेती, शाक वाटिका, सब्जियों की खेती।
- प्रवर्धन, कायिक प्रवर्धन।
- फल परीक्षण, फल संरक्षण–जैम, जेली, सॉस, अचार बनाना।
- जलवायु विज्ञान।
- फसल चक्र।
सामाजिक अध्ययन की अवधारणा और पद्धतिः–
- कक्षा की प्रक्रियाएं, क्रियाकलाप और व्याख्यान।
- विवेचित चिंतन का विकास करना।
- पूछताछ/अनुभवजन्य साक्ष्य।
- सामाजिक विज्ञान/सामाजिक अध्ययन पढ़ाने की समस्याएं।
- प्रोजेक्ट कार्य।
- मूल्यांकन
भाषाः हिन्दी, संस्कृत तथा अंग्रेजी
पाठ्यक्रम
- व्याकरण एवं अपठित गद्यांश, पद्यांश, Grammar, Comprehension
विज्ञान
पाठ्यक्रम
- दैनिक जीवन में विज्ञान, गति, बल, ऊर्जा, दूरी, प्रकाश, ध्वनि, जीवों की दुनिया, मानव शरीर स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन, पदार्थ एवं पदार्थ की अवस्थाएँ।
गणित
पाठ्यक्रम
- अंकीय क्षमता, गणितीय संक्रियाएँ, दशमलव, स्थानीयमान, भिन्न, ब्याज, लाभ–हानि, प्रतिशत विभाज्य, गुणनखण्ड, ऐकिक नियम, सामान्य बीजगणित, क्षेत्रफल, औसत, आयतन, अनुपात, सर्वसमिकायें, सामान्य ज्यामिति, सामान्य सांख्यिकी।
पर्यावरण एवं सामाजिक अध्ययन
पाठ्यक्रम
- पृथ्वी की संरचना, नदियाँ, पर्वत, महाद्वीप, महासागर व जीव, प्राकृतिक सम्पदा, अक्षांश और देशान्तर, सौरमण्डल, भारतीय भूगोल, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, भारतीय समाज सुधारक, भारतीय संविधान, हमारी शासन व्यवस्था, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, भारतीय अर्थव्यवस्था एवं चुनौतियाँ, हमारी सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक आपदा प्रबन्धन।
शिक्षण कौशल
पाठ्यक्रम
- शिक्षण की विधियाँ एवं कौशल, शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त, वर्तमान भारतीय समाज एवं प्रारम्भिक शिक्षा, समावेशी शिक्षा, प्रारम्भिक शिक्षा के नवीन प्रयास, शैक्षिक मूल्यांकन एवं मापन, आरम्भिक पठन कौशल, शैक्षिक प्रबन्धन एवं प्रशासन।
बाल मनोविज्ञान
पाठ्यक्रम
- वैयक्तिक भिन्नता, बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक, सीखने की आवश्यकता की पहचान, पढ़ने के लिए वातावरण का सृजन करना सीखने के सिद्धान्त तथा कक्षा–शिक्षण में इनकी व्यवहारिक उपयोगिता एवं प्रयोग, दिव्यांग छात्रों हेतु विशेष व्यवस्था।
सामान्य ज्ञान/ समसामयिक घटनाएँ
पाठ्यक्रम
- समसामयिक महत्वपूर्ण घटनाएँ– अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रदेश से सम्बन्धित महत्वपूर्ण घटनाएँ स्थान, व्यक्तित्व, रचनाएँ, अन्तर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय पुरस्कार/खेल–कूद, भारतीय संस्कृति एवं कला आदि।
तार्किक ज्ञान
पाठ्यक्रम
- Analogies, Assertion and reason, Binary logic, Classification, Clocks and Calendars, Coded inequalities coding-decoding, critical reasoning, cubes number series, puzzles, symbols and notations, venn diaagrams and dice, data interpretation, direction sense test, grouping and selections, inferences, letter series.
सूचना तकनीकी
पाठ्यक्रम
- शिक्षण कौशल विकास, कक्षा–शिक्षण तथा विद्यालय प्रबन्धन के क्षेत्र में सूचना तकनीकी कम्प्यूटर, इन्टरनेट, स्मार्टफोन, ओ0ई0आर0 (ओपन एजुकेशनल रिसोर्स), शिक्षण में उपयोगी ऐप्स, डिजिटल, शिक्षण–सामग्री के उपयोग की जानकारी।
जीवन कौशल/प्रबन्धन एवं अभिवृत्ति
पाठ्यक्रम
- व्यवसायिक आचरण एवं नीति, प्रेरणा, शिक्षण की भूमिका (सुविधा–प्रदाता, अनुश्रवणकर्ता, नेतृत्वकर्ता, मार्गदर्शक, परामर्शदाता), संवैधानिक और मानवीय मूल्य, दण्ड एवं पुरस्कार व्यवस्था का प्रभावी प्रयोग।
Important datesPending verification
2026 cycle
Latest confirmed cycle has concluded
Answer Key Objection Window Opened: 2026-07-08
Next examination date has not yet been published in StudyBddy's verified official record. The date above is historical—not an upcoming deadline.
Full published timeline13 completed · 0 awaiting dates⌄
Answer Key Objection Window Opened
Completed2026-07-08
Notice History
CompletedAn entry dated 8 July 2026 is headed 'Shikshak Patrata Pariksha (UPTET-2026)' and links to the Commission's question-challenge login.
Exam Dates
Completed2026-07-02
Admit Card Issue
Completed2026-06-30
Exam District Intimation
Completed2026-06-22
Notice History
CompletedAn entry dated 22 June 2026 is headed 'U.P. Shikshak Patrata Pariksha-2026 (UPTET) pariksha karyakram' and links to the admit card site.
Notice History
CompletedAn entry dated 2 May 2026 is headed 'UPTET-2026 aavedan form High Court aadesh'.
Fee Reconciliation And Application Correction Last Date
Completed2026-05-01
Application Closes
Completed2026-04-26
Application Opens
Completed2026-03-27
Notice History
CompletedAn entry dated 27 March 2026 is headed 'U.P. Shikshak Patrata Pariksha (UPTET-2026)' and links to the OTR registration page at uptet.upessc.org.
Notice History
CompletedAn entry dated 24 March 2026 is headed 'UPTET 2026 — Uttar Pradesh Shikshak Patrata Pariksha 2026 ke vigyapan ke sambandh me', and a second entry the same day warns about a fake UPTET-2026 website.
Notice History
CompletedThe Commission's notice board carries an entry dated 20 March 2026 headed 'U.P. Shikshak Patrata Pariksha (UPTET) 2026' with two notice PDFs — the date the booklet itself records as the date of publication of the advertisement.
Job profile & salaryPending verification
CutoffsNot loaded
Previous-year papersPending verification
Books & study sourcesNot loaded
Official & trusted free resourcesPending verification
| Label | Url | What |
|---|---|---|
| UPESSC official website | Open ↗ | The Commission's own site. The Advertisement page, the notice board, results, cut-off lists and the Basic Education section all live here. The Commission states that it never corresponds with candidates personally and that all information is published on this website. |
| UPTET-2026 advertisement page | Open ↗ | The Commission's list of current advertisements. The UPTET-2026 entry, dated 27 March 2026, sits here with the Information Booklet PDF and the application link. |
| UPTET-2026 Information Booklet | Open ↗ | The authoritative document for this exam: dates, fees, eligibility, paper structure, duration, qualifying marks, applicability, certificate validity, the corrigendum on page one and the seven-page syllabus at Appendix-5. |
| UPTET application portal | Open ↗ | One Time Registration and the UPTET application form. As at 4 August 2026 registration and the correction window were closed, and the page states that fee-paid candidates will be able to log in to download their application form and payment receipt. |
| UPESSC admit card site | Open ↗ | The Commission's admit card download site, linked from the 22 June 2026 examination programme notice. |
| U.P. Pariksha Niyamak Pradhikari, Prayagraj | Open ↗ | The old UPTET host. It still carries a UPTET menu, but that page now returns only 'Check Schedule Activity is Closed......'. It currently runs U.P. D.El.Ed. registration and the U.P. Junior Aided Selection Exam (UPJASE). Helpline 0532-2467504 and 0532-2466769. |
How to applyPending verification
- 1Complete One Time Registration (OTR) on the Commission's official website. Only after OTR can the application for the examination be made.
- 2A candidate who wants to take the eligibility test at both the primary (classes 1 to 5) and upper primary (classes 6 to 8) levels, and who holds the necessary qualification for both, gets the facility to select both papers within a single online application.
- 3Pay the prescribed category fee for each paper selected.
- 4Amend the application if needed, but only until the last date for amendment. After that date no change or amendment to the application is possible.
FAQsPending verification
Does this row cover UPTET or Super TET?
UPTET. They are different examinations. UPTET is the eligibility test that produces a lifetime eligibility certificate but offers no post. 'Super TET' is the popular name for the separate Assistant Teacher recruitment examination for primary and upper primary schools, which is where posts are actually filled. Clause 3.1 of the UPTET-2026 booklet records that under the two-tier examination system every candidate wanting selection against a vacant Assistant Teacher post in those schools must first obtain qualifying marks in UPTET. No official document fetched for this record uses the phrase 'Super TET' — it is a coaching-market nickname.
Who conducts UPTET now?
The Uttar Pradesh Education Service Selection Commission, Prayagraj. The booklet states that rule 9(kh) of the Uttar Pradesh Education Service Selection Commission Act 2023, dated 21 August 2023, authorises the Commission to conduct the test. UPTET is no longer run from updeled.gov.in, whose UPTET page now returns only 'Check Schedule Activity is Closed......'.
What is the paper like?
150 multiple choice questions with four options each, one mark per question, in 150 minutes — two and a half hours. No negative marking. Paper I is for classes 1 to 5 and Paper II for classes 6 to 8. The paper is in Hindi and English except for the language subjects.
How are the 150 questions split?
Paper I: child development and teaching method 30, Language I Hindi 30, Language II English/Urdu/Sanskrit 30, Mathematics 30, Environmental Studies 30. Paper II: child development and teaching method 30, Language I Hindi 30, Language II English/Urdu/Sanskrit 30, and a 60-question block that is mathematics and science for a maths and science teacher, social studies for a social studies teacher, and either of the two for any other teacher. All sections are compulsory.
What score do I need to qualify?
90 marks out of 150, that is 60 per cent, for a general-category candidate. 82 marks out of 150, that is 55 per cent, for Scheduled Caste, Scheduled Tribe, Other Backward Class, EWS, dependants of freedom fighters, ex-servicemen and Divyang candidates.
How long is the certificate valid?
For lifetime, for all categories, from the date the result is issued — in pursuance of Government of Uttar Pradesh letter number 392/arsath-4-2021-9(16), Basic Education Section-4, Lucknow dated 16 June 2021. The Commission distributes the certificate electronically through DigiLocker.
Does passing UPTET get me a job?
No. Clause 10 states that qualifying UP-TET gives no person a right to recruitment or employment because it is only one of the eligibility criteria for appointment, and clause 3.2 states that applying for, appearing in or receiving the result or score card of UPTET-2026 creates no admissible claim to selection against any post. Final eligibility is certified by the recruiting agency or appointing authority.
What did the 2026 cycle cost and when did it run?
Rs 1000 per paper for General, EWS and OBC candidates, Rs 500 for SC and ST, Rs 300 for the Divyang category — charged separately for Paper I and Paper II. The advertisement was published on 20-03-2026, applications ran from 27-03-2026 to 26-04-2026 with fee reconciliation and corrections until 01-05-2026, examination districts were intimated on 22 June 2026, admit cards were issued on 30 June 2026, and the examination was held on 02, 03 and 04 July 2026.
Why might the exam run over several days, and does that affect my score?
Clause 9 allows the written examination to be held in more than one shift or on more than one day if applications are very numerous. Where it is, scores are normalised for comparative evaluation by the procedure laid down in the Commission's notice number Shi.Se.Aayog/2018/2025-26 dated 26-02-2026, and the Commission's decision is final.
Can I ask for my answer sheet to be re-checked?
No. The booklet states that scanning-based evaluation is done with great care and repeatedly scrutinised, and that no request for re-checking, re-assessment, re-evaluation or scrutiny of the OMR sheet, and no correspondence on the subject, is accepted.
Is there an age limit?
The Information Booklet prints no age band for UPTET. It does say that only the date of birth on the High School or equivalent certificate is accepted, and that candidature is treated as automatically cancelled where the date of birth is not stated or the candidate is over-age or under-age. Read the Commission's own booklet before assuming you are within range.
Final eligibility and dates are always subject to the latest official notification. Content marked “Pending verification” is not presented as verified advice.